इश्क़ फ़र्मूदा-ए-क़ासिद से सुबुक-गाम-ए-अमल
अक़्ल समझी ही नहीं म'अनी-ए-पैग़ाम अभी
“The love-giver, the messenger, gave a subtle message; The intellect has not yet understood the meaning of the word.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
इश्क़ ने क़ासिद से एक सूक्ष्म संदेश दिया है, जिसका अर्थ अभी बुद्धि समझ नहीं पाई है।
विस्तार
यह शेर उस उलझन को बयां करता है जब दिल और दिमाग़ आपस में टकराते हैं। जब महबूब कहता है कि 'अमल की राह छोड़ दो,' तो अक़्ल कन्फ्यूज़ हो जाती है। शायर कहते हैं कि अभी तो यह अक़्ल इस पैग़ाम के गहरे मक़सद को समझ ही नहीं पाई है। यह एक एहसास है कि कुछ बातें सिर्फ़ रूह से समझी जा सकती हैं, अक़्ल से नहीं।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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