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बे-ख़तर कूद पड़ा आतिश-ए-नमरूद में इश्क़
अक़्ल है महव-ए-तमाशा-ए-लब-ए-बाम अभी

I leapt recklessly into the fire of Nimarood, for love; still, my intellect is captivated by the spectacle of your lips.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

प्यार के लिए मैंने निमरूद की आग में कूदकर खुद को खतरे में डाल दिया, लेकिन अभी भी मेरा दिमाग आपके होंठों के नज़ारे से मोहित है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस कशमकश को बयां करता है जहाँ दिल और दिमाग़ एक-दूसरे से लड़ते हैं। शायर कहते हैं कि हम बिना किसी ख़ौफ़ के, नमरूद की आग में कूद पड़ते हैं—यानी जुनून में डूब जाते हैं। लेकिन.... यह अक़्ल अभी भी महबूब के लबों के नज़ारे से खिंची हुई है! यह दिखाता है कि इश्क़ में वज़न से ज़्यादा, नज़ारा मायने रखता है।

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