रहेगा रावी ओ नील ओ फ़ुरात में कब तक
तिरा सफ़ीना कि है बहर-ए-बे-कराँ के लिए
“O Ravi, o Nile, o Euphrates, how long shall you remain, Your boat is meant for the boundless, restless sea.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
रावी, नील और फ़ुरात में तुम कब तक रहोगे? तुम्हारा जहाज़ तो अथाह, बेचैन सागर के लिए है।
विस्तार
यह शेर एक बहुत ही ज़बरदस्त प्रेरणा है! इसमें शायर हमें बताते हैं कि जीवन में ठहरना नहीं है। रावी, नील और फ़ुरात तीन नदियाँ हैं, जो किसी सीमित दायरे का प्रतीक हैं। शायर पूछ रहे हैं कि आप कब तक इन छोटी सीमाओं में सिमटे रहेंगे? क्योंकि आपका सफ़ीना, आपकी असल मंज़िल, तो 'बहर-ए-बे-कराँ' यानी अथाह सागर के लिए है।
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