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सनम-कदा है जहाँ और मर्द-ए-हक़ है ख़लील
ये नुक्ता वो है कि पोशीदा ला-इलाह में है

My love, where is the place, and the man of truth, Khalil? This point is hidden within the 'La Ilah' (There is no god).

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

सनम, यह बताओ कि जहाँ और सच का आदमी, ख़लील, कहाँ है? यह बिंदु 'ला इलाह' में छिपा हुआ है।

विस्तार

यह शेर इंसानी मन की सबसे बड़ी उलझन को बयान करता है। शायर कहते हैं कि दुनिया का ध्यान तो बस 'सनम' (प्रियतम) पर है, आकर्षण में फंसा है। लेकिन वो एक गहरा नुक्ता बताते हैं... कि असल हकीकत तो कहीं और है। वो जगह है 'पोशीदा', जहाँ सिर्फ़ एक ही बात है—ला-इलाह। यानी, दुनिया की हर चकाचौंध से परे, सिर्फ़ रब का वजूद है।

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