न तख़्त-ओ-ताज में ने लश्कर-ओ-सिपाह में है
जो बात मर्द-ए-क़लंदर की बारगाह में है
“What is said in the court of the brave hero, Is not in the throne-and-crown, nor in the army-and-host.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
न तख़्त-ओ-ताज और लश्कर-ओ-सिपाह में नहीं, वह बात मर्द-ए-क़लंदर की बारगाह में है।
विस्तार
यह शेर हमें सिखाता है कि असली ताकत या ज्ञान महज़ तख़्त और ताज जैसी बाहरी चीज़ों में नहीं होता। शायर कहते हैं कि सबसे गहरी और महत्वपूर्ण बातें तो उस शख़्स के सामने होती हैं, जो दिल का सच्चा और बहादुर हो—यानी मर्द-ए-क़लंदर। यह एक बहुत ही गहरा संदेश है कि इंसान का चरित्र किसी भी सिंहासन से बड़ा होता है।
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