न कर अफ़रंग का अंदाज़ा उस की ताबनाकी से कि बिजली के चराग़ों से है इस जौहर की बर्राक़ी

“Do not judge the brilliance of this inherent quality by the glamour of a foreign light, For its brilliance is not from electric lamps, but from its own intrinsic glow.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

अजनबी के आकर्षण से इस आंतरिक चमक का अंदाज़ा मत लगाना, क्योंकि इसकी चमक बिजली के लैंपों से नहीं, बल्कि स्वयं के सार से है।

विस्तार

यह शेर हमें सिखाता है कि किसी की असली चमक या वजूद को बाहरी चीज़ों से नहीं आंकना चाहिए। शायर कहते हैं कि किसी की आंतरिक प्रतिभा (ताबनाकी) की चमक को बिजली की रोशनी से तुलना करके कम मत समझना। क्योंकि जो चमक अंदर से आती है, वो हमेशा असली और गहरी होती है। यह आत्म-मूल्य और मौलिकता का संदेश है।

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