वो आतिश आज भी तेरा नशेमन फूँक सकती है
तलब सादिक़ न हो तेरी तो फिर क्या शिकवा-ए-साक़ी
“Even today, your intoxicating breath can ignite the flames, If my heart doesn't crave you, then what complaint can I make to the cupbearer?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
वह आग आज भी तेरा नशा मन फूंक सकती है, अगर मेरा मन तेरी चाहत न हो तो फिर सेवार से क्या शिकायत?
विस्तार
यह शेर इश्क़ के उस जुनून को बयान करता है जो दिल में आग की तरह जलता है। शायर कहते हैं कि महबूब का जादू आज भी इतना गहरा है कि यह नशा मन में घोल सकता है। और फिर वह चुनौती देते हैं, साक़ी से... अगर मेरा सच्चा प्रेम, मेरी तलब, तुझमें नहीं रही, तो शिकायत करने का क्या मतलब? यह शेर उस मोहब्बत की गहराई को दिखाता है जो हर शिकायत से ऊपर होती है।
Comments
Read-only on web. Join the conversation in the Sukhan AI mobile app.
No comments yet.
