ज़रा तक़दीर की गहराइयों में डूब जा तू भी — अल्लामा इक़बाल
“Dip yourself also in the depths of destiny, for from this battlefield I have arrived as a restless spear.”
अर्थ
ज़रा तक़दीर की गहराइयों में डूब जा तू भी, कि इस जंगाह से मैं बन के तेग़-ए-बे-नियाम आया। (अर्थ: तू भी क़िस्मत की गहराइयों में उतर जा, क्योंकि मैं इस युद्ध के मैदान से एक बेचैन भाले की तरह आया हूँ।)
विस्तार
यह शेर तकदीर की गहराइयों में झाँकने और उसका सामना करने की बात करता है। शायर कहते हैं कि ज़िंदगी एक जंग का मैदान है, और मैं उस मैदान से एक जागते हुए, बे-नींद तलवार बनकर आया हूँ। यह सिर्फ़ एक चेतावनी नहीं है, बल्कि एक आह्वान है कि हमें अपनी नियति के हर उतार-चढ़ाव को पूरी समझदारी और साहस के साथ स्वीकार करना होगा।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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