ये मिसरा लिख दिया किस शोख़ ने मेहराब-ए-मस्जिद पर — अल्लामा इक़बाल

ये मिसरा लिख दिया किस शोख़ ने मेहराब-ए-मस्जिद पर ये नादाँ गिर गए सज्दों में जब वक़्त-ए-क़याम आया

“By whose playful hand was this verse inscribed upon the mosque's archway? When the time for standing prayer arrived, the naive ones fell into prostration.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

किस शरारती ने मस्जिद के मेहराब पर यह शेर लिख दिया? जब क़याम (खड़े होने) का समय आया, तो वे मूर्ख सज्दों में गिर गए।

विस्तार

यह शेर इंसानी आचरण और इबादत की सच्चाई पर एक गहरा तंज़ है। शायर ने मस्जिद के मेहराब की खूबसूरती का ज़िक्र किया है, लेकिन असली बात तो इस बात में है कि जब खड़े होने का वक़्त आया, तो लोग सज्दों में गिर गए। यह विसंगति हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारी इबादत सिर्फ़ दिखावा है, या दिल से निकलती है!

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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