इश्क़ की तेग़-ए-जिगर-दार उड़ा ली किस ने — अल्लामा इक़बाल

इश्क़ की तेग़-ए-जिगर-दार उड़ा ली किस ने इल्म के हाथ में ख़ाली है नियाम ऐ साक़ी

“Who has flown the sword of love from the heart? Empty is the measure in the hands of knowledge, O cupbearer.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

इश्क़ की तेग़-ए-जिगर-दार उड़ा ली किस ने? ज्ञान के हाथ में तो खाली है नियाम ऐ साक़ी।

विस्तार

यह शेर एक गहरा दार्शनिक सवाल उठाता है। शायर पूछ रहे हैं कि दिल से निकली इश्क़ की तेग़ को किसने निकाला? यह सवाल है जुनून की गहराई का। और दूसरी लाइन में साक़ी से कहते हैं कि ज्ञान का हाथ भी खाली है। इसका मतलब है कि दुनिया का सारा ज्ञान, सारा इल्म.... वह उस खालीपन को नहीं भर सकता जो सच्चे इश्क़ या रूहानी एहसास ने पैदा किया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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