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मिरे जुनूँ ने ज़माने को ख़ूब पहचाना
वो पैरहन मुझे बख़्शा कि पारा पारा नहीं

My passion made the world recognize me well, It granted me a garment that was not a fleeting spell.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मेरे जूनून ने ज़माने को खूब पहचाना, वो परिधान मुझे बख़्शा कि पारा पारा नहीं।

विस्तार

यह शेर जुनून और पहचान के रिश्ते को समझाता है। शायर कह रहे हैं कि जब हमारा जुनून बहुत गहरा होता है, तो दुनिया उसे नज़रअंदाज़ नहीं कर पाती। वह हमें एक ऐसी पहचान देती है, एक ऐसा दर्जा देती है, जो सिर्फ़ दिखावा नहीं है। यह एक ऐसी मज़बूत बुनियाद है जो हमारे अंदर से आती है, और जो हमेशा हमारे साथ रहती है। यह पूरी ज़िंदगी का समर्पण माँगता है।

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