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यहीं बहिश्त भी है हूर ओ जिबरईल भी है
तिरी निगह में अभी शोख़ी-ए-नज़ारा नहीं

Here there is Paradise, and Houris and Gabriel too, Yet in your glance, the show of spectacle is not yet seen.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

यहीं स्वर्ग है, और हूर और जिब्रील भी हैं, पर तुम्हारी निगाह में अभी नज़ारे का शोख़ी नहीं है।

विस्तार

यह शेर प्रेम की उस चरम अवस्था को बयां करता है, जब प्रेमी को दुनिया की हर खुशी और हर जन्नत एक मामूली बात लगती है। शायर कहते हैं कि आस-पास स्वर्ग है, हूर हैं, जिब्रील हैं—सब कुछ मौजूद है। लेकिन फिर भी, वह महबूब की निगाह में एक ऐसी नशा है, एक ऐसी शोख़ी है, जो किसी भी जन्नत से कहीं ज़्यादा असरदार है! यह इश्क की पराकाष्ठा है।

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