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इक इज़्तिराब मुसलसल ग़याब हो कि हुज़ूर
मैं ख़ुद कहूँ तो मिरी दास्ताँ दराज़ नहीं

If this restless yearning were only absent, my dear, / If I speak of myself, my story is not long.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

अगर यह बेचैनी लगातार ग़ायब हो, ऐ हुज़ूर, तो मैं खुद कहूँ तो मेरी कहानी लंबी नहीं है।

विस्तार

यह शेर इंसानी बेचैनी और मानसिक उलझनों पर बात करता है। शायर कहते हैं कि अगर यह बेचैनी लगातार बनी रहे, तो यह ग़ायब हो जाएगी। इसका कारण यह है कि वक्ता स्वयं स्वीकार करता है कि उसकी कहानी लंबी नहीं है। यह एक गहरा एहसास है कि कई बार, सबसे बड़ा बोझ वो कहानी होती है जो हम खुद अपने मन में बना लेते हैं।

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