किस को मालूम है हंगामा-ए-फ़र्दा का मक़ाम मस्जिद ओ मकतब ओ मय-ख़ाना हैं मुद्दत से ख़मोश

“Who knows the state of tomorrow's uproar, Mosque, school, and tavern have been silent for ages.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

किसी को मालूम है कल के हंगामे का ठिकाना। मस्जिद, पाठशाला और मयखाना लंबे समय से शांत हैं।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि एक गहरा सामाजिक आईना है। शायर पूछ रहे हैं कि आने वाले तूफ़ान (हंगामा-ए-फ़र्दा) का ठिकाना कहाँ है? वह देखते हैं कि समाज के तीन सबसे अहम स्तंभ—मस्जिद, मकतब और मय-ख़ाना—ये सब इतने लंबे समय से खामोश हैं। यह खामोशी बताती है कि समाज एक ठहराव की अवस्था में है, और यही ठहराव एक बड़े बदलाव का संकेत है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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