मैं ने पाया है इसे अश्क-ए-सहर-गाही में
जिस दुर-ए-नाब से ख़ाली है सदफ़ की आग़ोश
“In the tears of the early morning, I have found it, From the embrace of the shell, which is empty of the water's stream.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मैंने इसे सुबह के आँसुओं में पाया है, जो उस सीप की गोद से है जिसमें पानी की धारा नहीं है।
विस्तार
यह शेर हमें बताता है कि कुछ बेहतरीन चीज़ें हमें सुबह के आँसुओं (अश्क-ए-सहर-गाही) में मिलती हैं। शायर कह रहे हैं कि जिस जगह पानी का स्रोत (नाब) भी नहीं है, उस सीप (सदफ़) की गोद में भी कोई गहरा रहस्य छिपा है। इसका मतलब है कि सच्चा ज्ञान या सुकून बड़े, खुले स्रोतों में नहीं, बल्कि जीवन की सबसे शांत, छोटी-छोटी बूंदों में मिलता है। यह एक अद्भुत खोज है!
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