मक़ाम-ए-गुफ़्तुगू क्या है अगर मैं कीमिया-गर हूँ
यही सोज़-ए-नफ़स है और मेरी कीमिया क्या है
“What is the station of conversation, if I am an alchemist? Is this the burning of the soul, and what is my alchemy?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अगर मैं एक रसायनज्ञ (कीमिया-गर) हूँ, तो बातचीत का स्थान क्या है? क्या यह आत्मा का जलना है, और मेरा रसायन क्या है?
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ शब्दों की बात नहीं करता, बल्कि आत्मा की गहराई की बात करता है। शायर कहते हैं कि जब आप खुद को पूरी तरह से जान लेते हैं, जब आप अपने भीतर की कला (कीमिया) को पहचान लेते हैं, तो बाहर की दुनिया की कोई भी तारीफ़ या बातचीत का मंच बेमानी हो जाता है। असली जादू तो इस नफ़्स के जलने में है, इस जुनून में है! यह एक आंतरिक क्रांति का ऐलान है।
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