ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले — अल्लामा इक़बाल

ख़ुदी को कर बुलंद इतना कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा बंदे से ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है

“Elevate your self-esteem so high, that before every destiny, God Himself asks the servant, 'Tell me, what is your will?'”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

अपने आप को इतना ऊँचा उठाओ कि हर तक़दीर से पहले ख़ुदा ख़ुद बंदे से पूछे, 'बता तेरी रज़ा क्या है?'

विस्तार

यह शेर सिर्फ शब्दों का खेल नहीं है, यह तो ज़िंदगी का फ़लसफ़ा है। शायर हमें 'ख़ुदी' को बुलंद करने की बात कर रहे हैं। इसका मतलब है कि आपको अपने आत्म-सम्मान और अपनी पहचान को इतना मज़बूत बनाना होगा कि आप किसी भी हालात या तक़दीर के सामने झुकें नहीं। जब आप खुद में विश्वास पा लेते हैं, तो आप एक ऐसी ऊंचाई पर पहुँच जाते हैं... जहाँ सिर्फ़ ईश्वर ही आपसे पूछकर पुष्टि करेगा। यह आत्म-विश्वास की सबसे ऊँची आवाज़ है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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