रगों में गर्दिश-ए-ख़ूँ है अगर तो क्या हासिल
हयात सोज़-ए-जिगर के सिवा कुछ और नहीं
“If there is a raging current of blood in your veins, then what gain is there Other than the burning agony of the heart's life?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
अगर तुम्हारी नसों में खून का ज्वार है, तो क्या मिलेगा? दिल की आग के दर्द के अलावा कुछ नहीं।
विस्तार
यह शेर हमें ज़िंदगी के मतलब पर गहराई से सोचने को मजबूर करता है। शायर कहते हैं कि क्या सिर्फ़ रगों में खून का दौड़ना ही ज़िंदगी है? नहीं! असली ज़िंदगी तो जिगर की उस आग में है, उस जुनून में है जो हमें जलाती है। यह शेर बताता है कि वजूद सिर्फ़ साँस लेना नहीं, बल्कि दिल से जीना है।
