किए हैं फ़ाश रुमूज़-ए-क़लंदरी मैं ने — अल्लामा इक़बाल

किए हैं फ़ाश रुमूज़-ए-क़लंदरी मैं ने कि फ़िक्र-ए-मदरसा-ओ-ख़ानक़ाह हो आज़ाद

“I have revealed the secret codes of the ascetic life, So that the thought of the school and the khanqah may be free.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

मैंने कंदरी के रहस्यमय संकेत खोल दिए हैं, ताकि विद्यालय और खानक़ाह का विचार आज़ाद हो सके।

विस्तार

यह शेर अल्लामा इकबाल साहब की तरफ से ज्ञान और अध्यात्म की आज़ादी की पुकार है। शायर कहते हैं कि उन्होंने वो गहरे, छिपे हुए रहस्य (रुमूज़) खोल दिए हैं, ताकि न सिर्फ़ मदरसे की शिक्षा, बल्कि ख़ानक़ाह की आध्यात्मिक सोच भी... एक नई आज़ादी पा सके। यह सीमाओं से परे की सोच की बात है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठ
हिंदी अर्थ
अंग्रेज़ी अर्थ
हिंदी विस्तार
अंग्रेज़ी विस्तार
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.