ऋषी के फ़ाक़ों से टूटा न बरहमन का तिलिस्म — अल्लामा इक़बाल

ऋषी के फ़ाक़ों से टूटा न बरहमन का तिलिस्म असा न हो तो कलीमी है कार-ए-बे-बुनियाद

“From the Rishi's vacant eyes, the Brahmin's spell has broken; if not this, then the magic is baseless.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

ऋषि की खाली आँखों से ब्राह्मण का जादू टूट गया; अगर ऐसा न हो, तो यह जादू ही बेबुनियाद है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ धर्म की बात नहीं करता, यह तो इंसान की सोच पर सवाल उठाता है! शायर कहते हैं कि ज्ञान और आस्था का कोई भी बाहरी आडंबर.... कोई जादू नहीं कर सकता। अगर ऋषि-मुनियों की कृपा से भी किसी के भ्रम का पर्दा नहीं उठ सकता, तो हमारी सिर्फ़ ज़ुबान से निकली 'कलमा'.... किस आधार पर है? यह शेर हमें गहराई से सोचने पर मजबूर करता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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