न फ़लसफ़ी से न मुल्ला से है ग़रज़ मुझ को — अल्लामा इक़बाल

न फ़लसफ़ी से न मुल्ला से है ग़रज़ मुझ को ये दिल की मौत वो अंदेशा ओ नज़र का फ़साद

“My purpose is not from the philosopher nor from the cleric, It is the ruin of the heart, the fear, and the gaze's discord.”

— अल्लामा इक़बाल

अर्थ

मेरा उद्देश्य न तो फ़लसफ़े से है और न ही मुल्ला से, यह दिल की मौत, वह आशंका और नज़र का बिछोह है।

विस्तार

यह शेर इंसान के दिल की सबसे गहरी उलझन को बयान करता है। शायर कहते हैं कि उनकी परेशानी न तो किसी दार्शनिक मत में है और न ही किसी धार्मिक नियम में। उनका असली संघर्ष तो दिल के अंदर है। वह दर्द जो उन्होंने बयां किया है—यह अंदेशा और नज़रों के फ़साद से उपजा है। यह वह भावनात्मक उथल-पुथल है, जो किसी भी तर्क या ज्ञान से परे है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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