ये मदरसा ये जवाँ ये सुरूर ओ रानाई
इन्हीं के दम से है मय-ख़ाना-ए-फ़रंग आबाद
“This madrasa, this youth, this intoxication, and this grace, By these four things, the tavern of the foreign has found its place.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यह मदरसा, यह जवानी, यह नशा और यह नज़ाकत, इन्हीं चारों के कारण विदेशी का मयखाना آباد है।
विस्तार
यह शेर सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, यह एक गहरा तंज़ है! शायर साहब कहते हैं कि जो मदरसा, जो जवानी, और जो उत्साह... ये सब चीज़ें, इन्हें ही देखकर ये 'मय-ख़ाना-ए-फ़रंग' (दुनिया का नशा) आबाद हो गया है। इसका मतलब है कि ज्ञान की जगह, दुनियावी मोह ने अपना डेरा बना लिया है।
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