करेंगे अहल-ए-नज़र ताज़ा बस्तियाँ आबाद — अल्लामा इक़बाल
“I will make the settlements vibrant with the art of the gaze, My sight is not directed toward Kufa or Baghdad.”
अर्थ
हम देखने वालों को ताज़गी से बस्तियाँ बसा देंगे, मेरी निगाह न तो कूफ़ा की तरफ है और न ही बग़दाद की।
विस्तार
यह शेर महज़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि नज़र और फ़ोकस की बात करता है। शायर कहते हैं कि उनका ध्यान किसी दूर की, ऐतिहासिक जगह पर नहीं है, जैसे कूफ़ा या बग़दाद। उनका असली लक्ष्य तो वो लोग हैं... जो नज़ारा देखते हैं, और नज़ारे को पहचानते हैं। यह एक बयान है कि असली कला और खूबसूरती की पहचान महँगे किवाड़ों में नहीं, बल्कि दिल की गहराई में होती है।
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