मैं ऐसे फ़क़्र से ऐ अहल-ए-हल्क़ा बाज़ आया — अल्लामा इक़बाल
“I have come free from such poverty, O inhabitants of the circle; your poverty is without wealth or sorrow.”
अर्थ
मैं ऐसे फ़क़्र से ऐ अहल-ए-हल्क़ा बाज़ आया, तुम्हारा फ़क़्र है बे-दौलती ओ रंजूरी।
विस्तार
यह शेर बहुत गहरा दर्शन है। शायर कह रहे हैं कि मैं तो दुनिया के फ़क़्र, यानी सामान्य ग़रीबी से दूर आ चुका हूँ। लेकिन जब वह सामने वाले की बात करते हैं, तो कहते हैं कि उसकी ग़रीबी अलग है। यह सिर्फ़ दौलत की कमी नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी रंजिश है, एक ऐसा दुःख है जो बहुत गहरा है। यह ग़रीबी दिल की है, और दिल की ग़रीबी सबसे बड़ी होती है।
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