तक्मा कोई गिरा है महताब की क़बा का
ज़र्रा है या नुमायाँ सूरज के पैरहन में
“Has some dust fallen from the robe of the moon (Mahab) of yours, Or is it merely a particle visible on the clothes of the sun?”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
क्या यह महताब के वस्त्र से कोई धूल का कण गिरा है, या यह केवल सूरज के पहनावे पर दिखाई देने वाला कोई कण है?
विस्तार
यह शेर चाँद और सूरज की भव्य उपमा से एक गहरा सवाल पूछता है। शायर पूछते हैं कि अगर हमें कहीं कोई तक्मा दिखाई दे.... तो क्या वह चाँद के लिबास से गिरा कोई वास्तविक दाग़ है? या बस सूरज के कपड़ों पर पड़ी कोई धूल का कण? यह नज़रों के भ्रम और वास्तविकता के बीच के अंतर को दर्शाता है। शायर हमें सिखाते हैं कि हमें किसी भी चीज़ को उसके वास्तविक रूप में देखना चाहिए, न कि केवल बाहरी नज़ारों के हिसाब से।
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