फ़िक्र-ए-'अरब को दे के फ़रंगी तख़य्युलात इस्लाम को हिजाज़-ओ-यमन से निकाल दो

“By giving the concern of the Arabs to the foreign imaginations, remove Islam from Hijaz and Yemen.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

अरबों की चिंता को विदेशी कल्पनाओं को देकर, इस्लाम को हिजाज और यमन से निकाल दो।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि एक गहरा तंज़ है! शायर यहाँ उन लोगों को चुनौती दे रहे हैं जो 'अरबी फ़िक्र' का नाम लेकर कुछ बाहरी विचार (foreign ideas) फैला रहे हैं। उनका कहना है कि अगर हमारी सोच और हमारी पहचान को बाहरी ताक़तों के हाथों में दे दिया गया, तो इस्लाम अपने मूल स्थानों, जैसे हिजाज़ और यमन से हमेशा के लिए दूर हो जाएगा। यह एक चेतावनी है, एक आगाज़ है कि अपनी जड़ें मत भूलना।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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