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वो फ़ाक़ा-कश कि मौत से डरता नहीं ज़रा
रूह-ए-मोहम्मद उस के बदन से निकाल दो

That person who fears no death, O poet, Extract the spirit of Muhammad from his body.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

जो व्यक्ति फ़ाक़ा-कश की मौत से नहीं डरता, उससे मुहम्मद की रूह उसके शरीर से निकाल दो।

विस्तार

यह शेर केवल शब्दों का खेल नहीं है, बल्कि एक गहरा आध्यात्मिक संदेश है! शायर यहाँ ज्ञान और सच्चाई के उस स्तर की बात कर रहे हैं, जहाँ शारीरिक सीमाओं से परे जाना पड़ता है। 'फ़ाक़ा-कश' वह है जो नकाब हटाकर सच दिखाता है। और दूसरी पंक्ति... यह उस आत्मा की बात करती है, जो केवल देह तक सीमित न हो। यह एक बहुत ही ऊँचा, चुनौतीपूर्ण विचार है।

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