तू बे-बसर हो तो ये माना-ए-निगाह भी है — अल्लामा इक़बाल
“If you are idle, then accept this gaze of mine, / Otherwise, the world is a burning place, O faithful one, O beloved.”
अर्थ
अगर तुम खाली हो, तो मेरी इस नज़रों को स्वीकार करो, वरना यह दुनिया एक जलता हुआ स्थान है, ऐ मोमिन, ऐ ख़स ओ ख़ाशाक।
विस्तार
ये शेर आशिक़ के दिल की उस गहरी उलझन को बयान करता है, जब मोहब्बत की रस्में भी भारी पड़ने लगती हैं। शायर कहते हैं कि अगर महबूब बेवजह ही बेपरवाह हो, तो बस उसकी एक नज़र देखना भी काफ़ी है। वरना.... इस दुनिया को, एक मसीहा के लिए, बस एक जलता हुआ रेगिस्तान ही लगता है। क्या आप कभी किसी एक नज़र पर इतने निर्भर हुए हैं?
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