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यही ज़माना-ए-हाज़िर की काएनात है क्या दिमाग़ रौशन दिल तीरा निगह बेबाक

Is this the universe of the present age, or is it your bright mind, your heart, and your fearless gaze?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

क्या यह आज के ज़माने की कायनात है, या यह तुम्हारा रोशन दिमाग़, तुम्हारा दिल और तुम्हारी बेबाक निगाह है।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ एक दौर की बात नहीं करता, बल्कि इंसान के अंदर के तूफ़ान को दिखाता है। शायर पूछते हैं कि क्या यह आज का ज़माना ही हमारी पूरी कायनात है? जवाब है, जी हाँ! लेकिन इस कायनात में दिमाग़ की रौशनी, दिल का बेक़रार होना और निगाहों का बेबाक होना... ये सब मिलकर एक आग लगा देते हैं। यह शेर हमें सिखाता है कि ज़माने से ज़्यादा ज़रूरी, इंसान का अपना जुनून और उसकी हकीकत होती है।

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