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उरूज-ए-आदम-ए-ख़ाकी के मुंतज़िर हैं तमाम
ये कहकशाँ ये सितारे ये नील-गूँ अफ़्लाक

All are awaiting the ascent of mortal dust, These galaxies, these stars, these sapphire skies of space.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

ये कहकशाँ, ये सितारे और ये नीले आकाश के सभी हिस्से, सब मिलकर धूल के मानव के उत्थान का इंतज़ार कर रहे हैं।

विस्तार

यह शेर इंसान के महत्व और नियति के विशाल दायरे को दर्शाता है। शायर कहते हैं कि यह पूरी कायनात—ये गैलेक्सी, ये सितारे, ये नीले आसमान—सब एक चीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं। वो इंतज़ार है 'आदम के उठने' का, यानी मनुष्य के उत्थान का। यह एक गहरा संदेश है कि इंसान का जीवन सिर्फ़ ज़मीन तक सीमित नहीं है, इसका महत्व ब्रह्मांड जितना विशाल है।

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