मिरे लिए तो है इक़रार-ए-बिल-लिसाँ भी बहुत — अल्लामा इक़बाल
मिरे लिए तो है इक़रार-ए-बिल-लिसाँ भी बहुत
हज़ार शुक्र कि मुल्ला हैं साहिब-ए-तसदीक़
“For me, even the declaration of the tongue is much, / A thousand thanks that you are the master of truth.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
मेरे लिए तो है ज़ुबान से इक़रार भी बहुत, हज़ार शुक्र कि मुल्ला हैं साहिब-ए-तसदीक़।
विस्तार
यह शेर बताता है कि केवल बातों से किया गया इक़रार काफी नहीं होता। शायर कहते हैं कि मेरे लिए तो सिर्फ ज़ुबान से हाँ कहना भी बहुत है। लेकिन उन्हें असली सुकून और इत्मीनान इसलिए मिलता है, क्योंकि सामने वाला व्यक्ति 'साहिब-ए-तसदीक़' है—यानी वह सच को साबित करने वाला, वह जिसने हर बात को पक्का कर दिया!
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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