अगर हो इश्क़ तो है कुफ़्र भी मुसलमानी — अल्लामा इक़बाल
“If there is love, there is also disbelief (Kufr) among Muslims; If not, the Muslim man himself is an infidel and heretic.”
अर्थ
अगर इश्क़ है तो मुसलमानी में कुफ़्र भी है, और अगर नहीं है, तो मुसलमाँ मर्द भी काफ़िर और ज़िंदीक़ है।
विस्तार
यह शेर आलामा इकबाल ने इश्क़ और ईमान के गहरे रिश्ते पर बात की है। शायर कहते हैं कि अगर आप सच्चे इश्क़ को अपनाते हैं, तो आपको मुसलमानी (इस्लामी) नज़र से कुफ़्र (ना-इमानी) का इल्ज़ाम लग सकता है। और अगर आप इश्क़ को छोड़ देते हैं, तो शायद आपका खुद का ईमान भी सवालों के घेरे में आ जाएगा। यह भावनाओं और सिद्धांतों के बीच की उलझन है।
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