रोज़-ए-हिसाब जब मिरा पेश हो दफ़्तर-ए-अमल आप भी शर्मसार हो मुझ को भी शर्मसार कर

“When the day of reckoning is presented in the office of deeds, Do you also bring me to shame, as you have done to me?”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

जब मेरा हिसाब का दिन कर्मों के दफ़्तर में पेश होगा, तो आप भी मुझे शर्मिंदा करें, जैसा आपने मुझे किया है।

विस्तार

यह शेर असल में आखिरी दिन, यानी हिसाब-किताब के दिन की बात करता है। शायर कहते हैं कि जब मेरा कर्मों का हिसाब होगा, तो मैं सिर्फ खुद को शर्मसार नहीं करना चाहता.... बल्कि यह चाहता है कि आप भी शर्मसार हों! यह सिर्फ व्यक्तिगत पाप की बात नहीं है, बल्कि एक साझा नैतिक ज़िम्मेदारी की बात है। यह एक गहरा आध्यात्मिक एहसास है जो हमें हमेशा अपने आचरण के प्रति जागरूक रहने को कहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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