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नग़्मा-ए-नौ-बहार अगर मेरे नसीब में न हो
उस दम-ए-नीम-सोज़ को ताइरक-ए-बहार कर

If the melody of nine springs is not in my fate, Then make this scorching moment of the afternoon a season of spring.

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

यदि नौ बहारों का नग़मा मेरे नसीब में न हो, तो इस अर्ध-ज्वलन (दोपहर) को बहार का मौसम बना दो।

विस्तार

यह शेर सिर्फ़ खूबसूरती की बात नहीं करता, यह तो ज़िन्दगी की हिम्मत की बात है। शायर कहते हैं कि अगर नसीब में नौ-बहारों का नज़राना न हो.... तो भी हमें उस 'आधे जले हुए पल' को पहचानना होगा। और उसे, उसे पूरी बहार में तब्दील करने का हुनर पाना होगा। यह एक उम्मीद है, एक वादा है कि हर अधूरा पल, हर दर्द.... एक नई शुरुआत कर सकता है।

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