आलम है फ़क़त मोमिन-ए-जाँबाज़ की मीरास
मोमिन नहीं जो साहिब-ए-लौलाक नहीं है
“The world is merely the inheritance of the devoted heart, If one is not devoted, then the Lord's grace is absent.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यह संसार केवल समर्पित हृदय (मोमिन-ए-जाँबाज़) की विरासत है; यदि कोई समर्पित नहीं है, तो प्रभु का कृपा (साहिब-ए-लौलाक) नहीं है।
विस्तार
यह शेर बताता है कि दुनिया का असली मालिक कौन है। शायर कहते हैं कि यह पूरी कायनात सिर्फ़ उस मोमिन की निशानी है, जो अपने लिए सब कुछ कुर्बान कर दे। और एक बात और... जो कोई भी सच्ची आत्मिक सच्चाई या ज्ञान (लौलाक) का मालिक बनना चाहता है, वो सिर्फ़ एक सच्चा मोमिन ही हो सकता है। यह आस्था और समर्पण की बात है!
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