तिरा बहर पुर-सुकूँ है ये सुकूँ है या फ़ुसूँ है
न नहंग है न तूफ़ाँ न ख़राबी-ए-किनारा
“Is this peace a tranquil rest, or an illusion's grace? It is neither a lion nor a storm's harsh embrace.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
तुम्हारा किनारा शांत समुद्र जैसा है; क्या यह शांति है या एक भ्रम? यह न तो शेर है और न ही तूफ़ान की तबाही।
विस्तार
यह शेर, जो कि अल्लामा इकबाल साहब का है, सुकून की गहराई को समझाता है। शायर पूछते हैं— क्या यह शांति सचमुच की शांति है, या यह बस एक भ्रम है? वो कहते हैं कि किनारा तो बहुत शांत है, कोई नहंग (बाढ़) है, कोई तूफ़ान नहीं, कोई तबाही नहीं। लेकिन इस ठहराव को देखकर शायर को शक होता है... कि कहीं ये सुकून खुद में ही एक धोखा तो नहीं!
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