हरम के दिल में सोज़-ए-आरज़ू पैदा नहीं होता कि पैदाई तिरी अब तक हिजाब-आमेज़ है साक़ी

“In the heart of a harem, the yearning for desire is not born, For your birth, O cupbearer, is still shrouded in a veil.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

हरम के दिल में इच्छा की तड़प नहीं होती, क्योंकि साक़ी, तुम्हारा जन्म अभी भी परदे में लिपटा हुआ है।

विस्तार

यह शेर इश्क़ की उस गहराई को समझाता है, जहाँ चाहत की आग महफ़िल की रौनक से कहीं ज़्यादा गहरी होती है। शायर कहते हैं कि दिल में जो जुनून जलता है, वह किसी बंद या महफ़िल की नज़ाकत से नहीं आता। ऐसा इसलिए है, क्योंकि महबूब का असली रूप, उसका नज़ारा, आज भी किसी हिजाब के पीछे छिपा है। यह एहसास कराता है कि सबसे बड़ी कशिश हमेशा उस चीज़ में होती है जो पूरी तरह से सामने न हो.

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