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मता-ए-दीन-ओ-दानिश लुट गई अल्लाह-वालों की
ये किस काफ़िर-अदा का ग़म्ज़ा-ए-ख़ूँ-रेज़ है साक़ी

The pleasure of religion and wisdom has been plundered from the people of Allah; oh Saqi (cupbearer), whose agony of blood is this, from whom has the art of the disbeliever taken away?

अल्लामा इक़बाल
अर्थ

मता-ए-दीन-ओ-दानिश अल्लाह वालों से लूट गई, ये किस काफ़िर-अदा का ग़म्ज़ा-ए-ख़ूँ-रेज़ है साक़ी।

विस्तार

यह शेर एक गहरी शिकायत है.... ज्ञान और दीनदारी की भावना का जो नुकसान हुआ है, शायर उसे देखकर बहुत दुखी हैं। वह पूछ रहे हैं कि यह तबाही किस काफ़िर-अदा की शरारत है! यह शेर केवल धार्मिक बात नहीं है, बल्कि समाज की उस हालत पर तंज़ है, जहाँ सच्चाई और ज्ञान को लूट लिया गया है।

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