क्या ग़ज़ब है कि इस ज़माने में
एक भी साहब-ए-सुरूर नहीं
“How amazing it is that in this age, There is not even a master of ecstasy.”
— अल्लामा इक़बाल
अर्थ
यह कितना अद्भुत है कि इस युग में एक भी आनंद के स्वामी नहीं हैं।
विस्तार
यह शेर एक गहरे निराशा और विरह का भाव बयां करता है। शायर, अल्लामा इकबाल, कहते हैं कि आज के ज़माने में... वो जुनून नहीं बचा जो रूह को मदहोश कर दे। 'साहब-ए-सुरूर' का मतलब सिर्फ़ शराब का नशा नहीं, बल्कि जीवन के किसी गहरे, सच्चे एहसास या कलात्मक जोश को पाना है। यह एक तरह से समय की खोई हुई गहराई पर तंज है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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