कारवाँ थक कर फ़ज़ा के पेच-ओ-ख़म में रह गया मेहर ओ माह ओ मुश्तरी को हम-इनाँ समझा था मैं

“The caravan rested in the twists and turns of the atmosphere, I had mistaken the beloved moon and planets for my own.”

— अल्लामा इक़बाल
अर्थ

कारवाँ थककर हवा के घुमावदार हिस्सों में रुक गया, मैंने महबूब चंद्रमा और ग्रहों को अपना समझा था।

विस्तार

यह शेर प्रेम और जीवन की उलझन को बयां करता है। शायर कहते हैं कि मैं तो महबूब के नूर और चाँदनी की खूबसूरती में इतना खो गया था कि... मैंने उस जीवन के कठिन और टेढ़े-मेढ़े रास्ते को ही उनकी चमक-दमक समझ लिया। यह एहसास है कि दुनिया के मोह माया के आकर्षण में हम अक्सर अपने असली रास्ते से भटक जाते हैं।

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