मोहब्बत का तिरी बंदा हर इक को ऐ सनम पाया — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

मोहब्बत का तिरी बंदा हर इक को ऐ सनम पाया बराबर गर्दन-ए-शाह-ओ-गदा दोनों को ख़म पाया

“A slave to your love, O idol, I found each and every soul; Bowed equally in homage—the neck of king and beggar both, I found them bent.”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

ऐ सनम, मैंने हर किसी को तेरी मोहब्बत का बंदा पाया; बादशाह और भिखारी दोनों की गर्दन बराबर झुकी हुई पाई।

विस्तार

शायर कहते हैं कि ऐ मेरे महबूब, हर एक इंसान तेरी मोहब्बत का बंदा बन गया है। प्यार किसी के ओहदे या हैसियत को नहीं देखता। चाहे कोई शानदार बादशाह हो या गरीब भिखारी, शायर ने दोनों की गर्दनें तेरे सामने बराबर झुकी हुई पाईं। मोहब्बत के सामने सारे फर्क मिट जाते हैं। यहाँ ताकत और गरीबी का कोई मतलब नहीं रहता। घमंडी राजा और बेचारा फकीर एक ही स्तर पर आ जाते हैं, उनके सिर भक्ति में झुके होते हैं। यही प्यार की खूबसूरत सच्चाई है। यह सबको बराबर कर देता है, बड़े से बड़े को भी विनम्र बना देता है, ताकि सारे दिल मिलकर अपने प्यारे के आगे झुक जाएँ।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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