आजिज़ नवाज़ दूसरा तुझसा कोई नहीं — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

आजिज़ नवाज़ दूसरा तुझसा कोई नहीं रंजूर का अनीस है हमदम अलील का

“None other cherishes the helpless as you do— friend to the afflicted, companion of the ailing too.”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

तुझ जैसा बेबसों पर करम करने वाला दूसरा कोई नहीं; तू दुखी का मित्र और बीमार का साथी है।

विस्तार

यह शेर कृतज्ञता और कोमलता से भरा है। शायर कहता है कि तुझ जैसा दूसरा कोई नहीं, जो बेबसों पर मेहरबानी करता है और कमज़ोरों को सहारा देता है। तू दुख में डूबे हुए लोगों का सच्चा साथी है, और बीमार का हमदम है, जो उसके पास रहता है। यहाँ उस इंसान की तारीफ़ है जिसकी महानता ताक़त में नहीं, बल्कि दया और करुणा में है। वह टूटे दिलों को तसल्ली देता है और बीमारों को कभी अकेला नहीं छोड़ता। सीधे शब्दों में, यह ऐसी दुर्लभ और बेमिसाल मेहरबानी की सराहना है, जो इस दुनिया में कम ही देखने को मिलती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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