सुरमा किया जो बर्क़-ए-तजल्ली ने तूर को — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“The lightning of Thy splendour ground Mount Sinai into kohl— Thou wished, for darkened lashes, to grace a lover's eye.”
अर्थ
जब तजल्ली की बिजली ने तूर पहाड़ को सुरमा बना दिया, तो तुझे यह जलवा इसलिए मंज़ूर था कि वह किसी सुरमगीं आँख की शोभा बने।
विस्तार
यह शेर कोहे-तूर की मशहूर कहानी पर आधारित है, जहाँ ईश्वरीय रौशनी की एक चमक पहाड़ पर पड़ी थी। शायर इसे एक सुंदर मोड़ देता है। वह कहता है कि तजल्ली की वह बिजली पहाड़ को जलाने नहीं, बल्कि उसकी आँखों में सुरमा लगाने आई थी। क्यों? क्योंकि तुझे यही मंज़ूर था कि वह पहाड़ तेरे जलवे को देखे। इतने चमकते दर्शन को देखने के लिए पहले पहाड़ की आँखों को सुरमे से सजाना और तैयार करना ज़रूरी था। यानी वह जलती रौशनी असल में एक तोहफ़ा थी, पहाड़ की नज़र को इस क़ाबिल बनाने का तरीक़ा कि वह उस हसीन जलवे को देख सके जिसकी उसे चाह थी।
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