साएल हूँ मुझको क़ैद कम-ओ-बेश की नहीं — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

साएल हूँ मुझको क़ैद कम-ओ-बेश की नहीं मुख़्तार है करीम कसीर-ओ-क़लील का

“A beggar am I, bound by no constraint of less or more; The Generous One holds sway over both the scant and the vast.”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

मैं एक माँगने वाला हूँ, मुझे कम या ज़्यादा की कोई पाबंदी नहीं है। वह दयालु (ईश्वर) ही थोड़े और बहुत का मालिक है।

विस्तार

शायर कहते हैं, मैं तो बस एक माँगने वाला हूँ, देने वाले के सामने खड़ा एक सवाली। मुझे इस बात की चिंता नहीं कि मुझे कम मिले या ज़्यादा। मैं ऐसे हिसाब-किताब में बँधा हुआ नहीं हूँ। यह फ़ैसला तो पूरी तरह उस करीम, उस दयालु देने वाले का है। वही तय करता है कि किसे ढेरों दे और किसे थोड़ा। मेरा काम तो बस सच्चे दिल से माँगना और पूरा भरोसा रखना है। इस समर्पण में एक गहरा सुकून है। जब आप मात्रा को देने वाले पर छोड़ देते हैं, तो आप चिंता और लालच से मुक्त हो जाते हैं। सच्चा संतोष इसी में है कि ईमानदारी से माँगो और जो मिले उसे खुशी से स्वीकार करो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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