तूफ़ान में नाख़ुदाई कश्ती-ए-नूह की — ख़्वाजा हैदर अली आतिश

तूफ़ान में नाख़ुदाई कश्ती-ए-नूह की हक़्क़ा जो अबदी नहीं मुझसे कफ़ील का

“In the storm, the steering of Noah's ark itself— truly, were it not eternal, I would stand as surety for my Protector.”

— ख़्वाजा हैदर अली आतिश

अर्थ

तूफ़ान में नूह की कश्ती की नाख़ुदाई (कर्णधारी)—सच तो यह है कि अगर वह अबदी न होती, तो मैं अपने कफ़ील (रक्षक) की ज़मानत ले लेता।

विस्तार

ज़रा उस महान तूफ़ान की कल्पना कीजिए, और लहरों पर डगमगाती नूह की कश्ती। शायर उस कश्ती को तूफ़ान के बीच खेने और सुरक्षित किनारे तक पहुँचाने की बात करता है। यह छवि आस्था और सुरक्षा की बात कहने का एक तरीक़ा बन जाती है। यहाँ एक सरल और सुकून देने वाला सत्य है: एक ऐसा रखवाला है जिसकी देखभाल कभी ख़त्म नहीं होती, एक सुरक्षा जो स्थायी और शाश्वत है। जैसे वह कश्ती सबसे भयानक तूफ़ानों में भी तैरती रही, वैसे ही शायर ख़ुद को किसी अटूट शक्ति की छाया में महसूस करता है। यह याद दिलाता है कि ज़िंदगी की सबसे कठिन मुश्किलों में भी एक थामने वाला हाथ हो सकता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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