मिरी तरफ़ जो उन्हें खींचती कशिश दिल की — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“Had the heart's own pull been drawing them toward me, why would I hand the idols over to the brahmins' care?”
अर्थ
अगर दिल की वही कशिश उन्हें मेरी तरफ़ खींचती, तो मैं बुतों को बरहमनों के हवाले क्यों करता।
विस्तार
शायर अपनी महबूबा को एक ख़ूबसूरत बुत की तरह देखता है, और ख़ुद को उसका पुजारी मानता है। वह कहता है कि काश उसके अपने दिल की कशिश ही इतनी मज़बूत होती कि महबूबा उसकी तरफ़ खिंची चली आती। तब उसे बुतों को ब्रह्मणों के हवाले करने की ज़रूरत ही न पड़ती, यानी किसी बिचौलिये या धार्मिक मध्यस्थ की ज़रूरत न होती। यह एक नरम शिकायत है कि सच्ची मोहब्बत में अपनी ही कशिश काफ़ी होनी चाहिए, किसी बाहरी मदद की दरकार नहीं। इस शेर में मंदिर, बुत और पूजा की तस्वीरों के ज़रिए इश्क़ की तड़प और जुदाई का दर्द ख़ूबसूरती से बयान हुआ है।
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