नहीं देखा है लेकिन तुझको पहचाना हो आतिश ने — ख़्वाजा हैदर अली आतिश
“I have not seen you, yet my passion's fire has recognized you true, It is but just, O idol mine, that you lay claim to the divine.”
अर्थ
मैंने तुझे देखा नहीं, फिर भी आतिश ने तुझे पहचान लिया है। ऐ सनम, अगर तू ख़ुदाई का दावा करता है तो वह ठीक ही है।
विस्तार
इस शेर में शायर आतिश अपने महबूब से बड़े प्यार और श्रद्धा से बात कर रहे हैं। वे कहते हैं, मैंने तुझे आँखों से कभी देखा नहीं, फिर भी मैंने तुझे सच्चे दिल से पहचान लिया है। और ऐ मेरे ख़ूबसूरत सनम, अगर तू ख़ुद को ख़ुदा होने का दावा करता है, तो यह दावा बिल्कुल सही और जायज़ है। भाव यह है कि महबूब का हुस्न और उसकी मौजूदगी इतनी गहरी है कि वह ख़ुदाई की झलक जैसी लगती है। जैसे हम ख़ुदा को देख नहीं पाते पर उसकी नज़दीकी महसूस करते हैं, वैसे ही शायर अपने महबूब को दिल में पहचानते हैं। इसलिए उसे ख़ुदा कहना अतिशयोक्ति नहीं, बल्कि मोहब्बत की सच्चाई है।
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