वुसअत-ए-सई-ए-करम देख कि सर-ता-सर-ए-ख़ाक गुज़रे है आबला-पा अब्र-ए-गुहर-बार हुनूज़

“Behold the boundless striving of grace: across the dust from end to end, still wanders with blistered feet the pearl-scattering cloud.”

— मिर्ज़ा ग़ालिब
अर्थ

कृपा और उदारता के प्रयास का विस्तार देखिए कि मोतियों की वर्षा करने वाला बादल अब भी पूरी ज़मीन पर पैरों में छाले लिए भटक रहा है।

विस्तार

ग़ालिब यहाँ करुणा और निस्वार्थ देने के जज़्बे की एक बेहद ख़ूबसूरत तस्वीर खींचते हैं। मोतियों जैसी अनमोल बूँदें बरसाने वाला बादल सूखी ज़मीन को ज़िंदगी बख़्शने के लिए दर-ब-दर भटक रहा है, भले ही इस लंबे सफ़र में उसके पैरों में छाले पड़ गए हों। यह शेर हमें उस असीम प्यार और रहमत की याद दिलाता है, जो ख़ुद हर तकलीफ़ सहकर भी दूसरों की झोली भरता रहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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