“The river of sins ran dry from sheer lack of water, when even the hem of my robe had not yet grown wet.”
पापों की नदी पानी की कमी के कारण सूख गई, जबकि अभी तो मेरे दामन का किनारा भी भीगने नहीं पाया था।
ग़ालिब यहाँ अपने अल्हड़ और बेबाक अंदाज़ में अपने गुनाह करने की असीमित क्षमता का ज़िक्र कर रहे हैं। वे हल्की सी शिकायत के साथ कहते हैं कि गुनाहों की पूरी नदी ही पानी की कमी की वजह से सूख गई, जबकि अभी तो मेरे कुर्ते का कोना भी ठीक से भीग नहीं पाया था। इस चुटीले और शेखी भरे अंदाज़ के पीछे असल में इंसान की असीम प्यास और दुनिया के सीमित दायरों की गहरी कशमकश छिपी है।
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