“Until I beheld the grandeur of my beloved's graceful stature, / I had never believed in the turmoil of Judgment Day.”
जब तक मैंने अपने महबूब के क़द की सुंदरता और शान नहीं देखी थी, तब तक मुझे क़यामत के हंगामे और फ़ितने पर यक़ीन नहीं था।
शायर यहाँ महबूब के हुस्न और उसके दिलकश क़द-ओ-क़ामत की तारीफ़ बड़े ख़ूबसूरत अंदाज़ में कर रहे हैं। वे कहते हैं कि क़यामत और उसके हंगामों की बातें उन्होंने सिर्फ़ सुनी थीं और कभी उन पर यक़ीन नहीं किया था। लेकिन जैसे ही महबूब को पूरे वक़ार के साथ खड़ा देखा, तो दिल में ऐसी हलचल मची कि वे फ़ौरन समझ गए कि क़यामत का तूफ़ान असल में कैसा होता है।
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